Saturday, November 24, 2012

पहाड़ों पर कटती पहाड़ सी जिंदगी

बिहार-झारखंड की सीमा से लगी पहाड़ियों पर मूल रूप से प्रतिबंधित संगठन का वर्चस्व रहा है। जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा उन पहाड़ियों पर बसे गांव वाले या तलहटी वासी होते हैं।
गया जिला का सीमा क्षेत्र मुख्यालय से लेकर 100 किमी दूर डुमरिया प्रखंड क्षेत्र तक है। जहां की छोटे-छोटेपहाड़ राज्य का सीमांकन तो कर देते हैं। लेकिन यहां रहने वाले लोग विकास की रोशनी से मरहूम हैं।
डुमरिया प्रखंड के सीमा क्षेत्र में जंगल के बीच भोकहा, काचर, छकरबंधा, नारायणपुर आदि पंचायत के गांव आते हैं। पूरे डुमरिया की आबादी एक लाख 29 हजार है। 11 पंचायतों के इस प्रखंड में विकास की बात होती है तो यह सामान्य क्षेत्रों के लिए न कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए। पहाड़ी क्षेत्रों का हाल रहने वाले ही जानते हैं। उन्हें दोनों को (पुलिस व नक्सली) झेलना पड़ता है। कभी अच्छा नहीं होता।
इन पहाड़ियों पर लगभग एक दर्जन से अधिक गांव बसे हैं। जहां भोक्ता व भुइयां जाति के लोग अधिक है। इनका मुख्य रोजगार जंगल में लकड़ी चुनना और मजदूरी है। नक्सलियों का कारवां जब कभी इन गांवों से गुजरता है तो भोजन व रहने की व्यवस्था तो गांव वालों को करनी ही पड़ती है। चूंकि क्षेत्र में उनकी ही दबदबा है। इस बीच अगर पुलिस मुठभेड़ हुई तो इन पर नक्सलियों के संरक्षण देने का ठप्पा भी लग जाता है। गांव वाले मुखर होकर कुछ बोलते नहीं। लेकिन उनकी मजबूरी नक्सलियों के साथ है।
इन गांवों के बच्चों के लिए नवीगढ़, पनवाटांड़, नीमियांटांड़ में मध्य और प्राथमिक विद्यालय खोले तो गए हैं। पर शिक्षक भी कभी-कभी आते हैं। गांव वाले बड़े-बुजुर्ग खुद अशिक्षित हैं। वैसे में उनके बच्चों को शिक्षा के प्रति जागृति लाने की पहल हुई नहीं। स्वास्थ्य के लिए इनकी निर्भरता प्रखंड मुख्यालय पर है। जहां के रेफरल अस्पताल में खाकीवर्दी वालों का कब्जा है।
डुमरिया प्रखंड मुख्यालय में लगभग ढाई साल से प्रखंड विकास पदाधिकारी के पद पर कार्यरत शंभू चौधरी ने बताया कि केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाएं प्रखंड में भी लागू होती है। ऐसा नहीं कि पहाड़ी इलाके में योजनाएं नहीं जाती। लेकिन श्री चौधरी यह मानते हैं कि रिमोट एरिया होने के कारण संबंधित कर्मचारी या शिक्षक कभी-कभी नहीं पहुंचते हैं। ऐसे शिक्षकों पर कार्रवाई होगी तथा पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों तक विकास की हर योजना को पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

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